हम में से कुछ चाहते थे की अलख के माध्यम से सच में एक अलख जगाई जाए जो बड़ी बड़ी बातों से हट कर कुछ हो | हम मिलते रहें , विचार विमर्श चलता रहा और फिर सोचा की चलो ! अब बस लग जाते हैं J !! और इसकी परिणति हुई अलख२०११ नाम की उस यात्रा में | बहुत लोगो के विचार और कुछ करने की इच्छा का भान हुआ | भाव भांति भांति के थे पर आशय यही था कि “बस अब बहुत हुआ, अब निष्क्रिय ना बैठा जाए|”
आज ०१ अक्टूबर २०११ को इन्टरनेट पर भी इस मंतव्य को सबके साथ बांटा जा रहा है ताकि ऐसे मित्र जो की निम्नलिखित आदर्शो को अपना समझते हैं व् इस दिशा में एक एकीकृत प्रयास करने की कामना रखते हैं, वे हमारे साथ आयें और अपने विचार व् मार्गदर्शन से योगदान करें |
1. राष्ट्र व् राष्ट्रधर्म अन्य किसी भाव से सर्वोपरि रखना |
2. भारतीय संस्कृति का प्रचार व् उसके विषय में चेतना उत्पन्न करना |
3. स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग को बढावा देना तथा उनके बारे में जागृति उत्पन्न करना |
4. भारतीय भाषाओँ की उन्नति व् प्रोत्साहन |
5. सादे जीवन का अनुसरण व उसके विषय में जनमानस में चेतना उत्पन्न करना |
6. शारीरिक स्वास्थ्य व् व्यायाम इत्यादि को जीवन में अंगीकार करते हुए ऐसी जीवन शैली का प्रचार प्रसार करना |
7. श्रमिकों , किसानों , सैनिकों व् अन्य सभी कर्मजीवियों के प्रति आदरभाव व् उनके योगदान को सभी के संज्ञान में लाना |
अलख के माध्यम से हम एक ऐसी जीवन शैली के अवधारणा को बल देना चाहते हैं जहाँ हम कुछ छोटे छोटे प्रयासों के द्वारा ही सकारात्मकता , सात्विकता व् संतुष्टि का प्रवाह सभी के जीवन में ला सकें |
आज के इस भौतिक और भाग दौड़ के जीवन में इतना सोचना ही एक बड़ा ही सात्विक प्रयास है |पूरा प्रयास किया जायेगा अलख के मूल सिद्धांतो को जीवन में उतारने और अपने साथियों को प्रेरित करने का | हमेशा यह प्रश्न खड़ा होता है शुरुवात कौन करे ..और
ReplyDeleteअब शैलेश ji ने कुछ सार्थक प्रयास किया है तो आओ हम सब मिल कर इसे अपने जीवन में अपनाये और इसका प्रचार प्रसार करते रहे | आप का भवदीय : गिरीश
हर ७ अंक सभी गर्व भारतीय और जो भविष्य राष्ट्र की भलाई के लिए परवाह करते हैं उनको अत्यंत महत्व के हैं| मैं आपके साथ हूँ और हालांकि मैं उनमें से ज्यादातर पहले से ही अभ्यास कररह हूँ, लेकिन कार्यान्वयन पर अब से अधिक स्पष्टवादी और कठोर हो जाऊंगा| कृपया मुझे भविष्य की योजनाओं और कार्यों के बारे में सूचित रखें| मैं ऐसे किसी भी प्रयास का हिस्सा बनने के लिए उत्शुक हूँ|
ReplyDeleteकृपया मुझे मेरे गरीब(?) हिन्दी के लिए क्षमा करें :-)
सादगी का आदर्श मुझे बहुत भाता है।
ReplyDeleteराष्ट्रहित में हमें 'स्वयं' को पूर्ण रूप से समर्पित कर देना चाहिए. बहुत अच्छा और बहुत महत्वपूर्ण विचार रखा है आपने. आशा है कि सभी लोग इससे प्रेरित होकर देशहित में बहुमूल्य योगदान करेंगे.
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